झारखंड में दुर्गा विसर्जन को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। राज्यभर में करीब 14 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। वहीं, पुलिस संस्मरण दिवस पर रांची में शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी गई।
रांची, 21 अक्टूबर 2026। झारखंड में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन को सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। राज्यभर में विसर्जन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 14 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इस बीच, बुधवार को पुलिस संस्मरण दिवस के अवसर पर कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी गई। रांची के डोरंडा स्थित झारखंड सशस्त्र पुलिस-1 (जैप-1) परिसर में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा ने शहीद जवानों को नमन किया।
पुलिस संस्मरण दिवस पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि
पुलिस संस्मरण दिवस पर देशभर में कर्तव्य निर्वहन के दौरान शहीद हुए पुलिसकर्मियों के योगदान को याद किया गया। इस वर्ष पिछले एक साल के दौरान शहीद हुए 154 पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी गई, जिनमें झारखंड के तीन जवान भी शामिल हैं।
झारखंड के शहीद पुलिसकर्मियों में दुमका के पुलिस अवर निरीक्षक हेमंत भगत तथा पलामू के आरक्षी सुनील राम और संतन कुमार मेहता के नाम शामिल हैं। रांची में आयोजित समारोह के दौरान डीजीपी तदाशा मिश्रा ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर जवानों के बलिदान को सम्मान दिया। कार्यक्रम में शहीदों के योगदान को याद करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।
डीजीपी ने पुलिस सेवा की जिम्मेदारियों और चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिसकर्मी कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। कई बार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और लोगों की सुरक्षा करते हुए उन्हें सर्वोच्च बलिदान देना पड़ता है। पुलिस संस्मरण दिवस ऐसे जवानों के साहस और समर्पण को याद करने का अवसर है।
राज्य के 5,600 पूजा पंडालों की प्रतिमाओं का विसर्जन
दुर्गा पूजा के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में लाइसेंसी और गैर-लाइसेंसी मिलाकर करीब 5,600 दुर्गा पूजा पंडाल हैं। इन पंडालों की प्रतिमाओं का विसर्जन अलग-अलग स्थानों पर किया जाना है।
विसर्जन की प्रक्रिया बुधवार से शुरू हुई है और इसके लगभग तीन दिनों तक चलने की संभावना जताई गई है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के सड़कों और विसर्जन स्थलों पर पहुंचने की आशंका को ध्यान में रखते हुए पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रशासन का उद्देश्य भीड़ को व्यवस्थित रखना, यातायात सुचारु बनाए रखना और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटना
सीसीटीवी और फेस रिकग्निशन से निगरानी
सुरक्षा व्यवस्था के तहत संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर निगरानी की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीसीटीवी कैमरों के साथ फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके जरिए संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर पहचान संबंधी जांच में सहायता लेने की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा, किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए आकस्मिक योजना तैयार रखी गई है। जरूरत पड़ने पर अग्निशमन विभाग की गाड़ियों की सहायता भी ली जा सकेगी। सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस अधिकारियों के साथ मजिस्ट्रेट की तैनाती भी शामिल है।
शांतिपूर्ण विसर्जन के लिए प्रशासन सतर्क
दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान भीड़ प्रबंधन और यातायात नियंत्रण प्रशासन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। पुलिस की जिम्मेदारी है कि श्रद्धालुओं को निर्धारित मार्गों पर सुरक्षित आवागमन में मदद मिले और विसर्जन कार्यक्रम व्यवस्थित तरीके से संपन्न हों।
प्रशासन की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने, निर्देशों का पालन करने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है। किसी संदिग्ध गतिविधि या परेशानी की स्थिति में पुलिस को सूचना देने की सलाह भी दी गई है।
पुलिस संस्मरण दिवस पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि और विसर्जन के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था, दोनों ही पुलिस की जिम्मेदारियों को रेखांकित करते हैं। अब प्रशासन का ध्यान राज्यभर में विसर्जन कार्यक्रमों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने पर है।