Rajya Sabha Election 2026: झारखंड में 18 जून को होने वाले दो राज्यसभा सीटों के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हो गई हैं। चुनावी माहौल के बीच, सभी पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत पक्की करने के लिए रणनीतियां बनाने में जुटी हैं। जहां कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा ने अपना जनसंपर्क अभियान तेज़ कर दिया है, वहीं पार्टी का नेतृत्व भी चुनाव को लेकर पूरी तरह सक्रिय नज़र आ रहा है।
Rajya Sabha Election: कांग्रेस ने झोंकी ताकत
शनिवार को पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा से मुलाक़ात की और उन्हें अपना समर्थन और शुभकामनाएँ दीं। इस बीच, प्रणव झा महागठबंधन में शामिल अलग-अलग पार्टियों के विधायकों से लगातार संपर्क कर रहे हैं और उनसे अपने पक्ष में वोट करने की अपील कर रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी गठबंधन की सहयोगी पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।
कांग्रेस राज्यसभा चुनाव को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती। इसी कोशिश के तहत, राज्य कांग्रेस प्रभारी के. राजू और चुनाव पर्यवेक्षक अजय शर्मा 14 जून को रांची पहुंच रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 15 जून को एक अहम बैठक होगी, जिसमें महागठबंधन के सभी विधायकों को एकजुट रखने और किसी भी संभावित क्रॉस-वोटिंग को रोकने की रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी।नॉमिनेशन पेपर की जांच और नाम वापस लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, चुनावी मैदान में तीन उम्मीदवार बचे हैं। इनमें JMM के बैजनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और BJP समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी शामिल हैं।
दूसरी सीट पर दिलचस्प मुकाबला
राज्यसभा चुनाव के गणित को देखें तो एक सीट जीतने के लिए पहली पसंद के 28 वोटों की ज़रूरत है। महागठबंधन के पास कुल 56 सीटें हैं, जिनमें JMM के 34, कांग्रेस के 16, RJD के 4 और CPI(ML) के 2 विधायक शामिल हैं। इसके आधार पर, JMM उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है। अगर महागठबंधन पूरी तरह एकजुट रहता है, तो उम्मीद है कि वह दोनों सीटें जीत लेगा।
दूसरी ओर, बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी को अभी 24 वोटों का समर्थन मिलने का अनुमान है। जीत पक्की करने के लिए उन्हें चार और वोटों की ज़रूरत होगी। ऐसे में NDA की नज़र विपक्ष खेमे के नाराज़ विधायकों पर है। राज्यसभा चुनाव के नतीजे न सिर्फ़ झारखंड की राजनीति की दिशा तय करेंगे, बल्कि ‘महागठबंधन’ की एकता और विपक्ष की रणनीति के लिए भी एक बड़ी परीक्षा साबित होंगे। अब सबकी नज़रें 18 जून को होने वाली वोटिंग और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिकी हैं।
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