Jharkhand Politics: बाबूलाल मरांडी बोले- धर्मांतरण करने वाले कैसे मांग सकते हैं आदिवासी अधिकार?

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Jharkhand Politics: बाबूलाल मरांडी बोले- धर्मांतरण करने वाले कैसे मांग सकते हैं आदिवासी अधिकार?

Jharkhand Politics: दिल्ली में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के जनजातीय समागम को लेकर झारखंड की सियासत गरमा गयी है. कांग्रेस और जेएमएम नेताओं के इस कार्यक्रम का विरोध करने के बाद अब बीजेपी नेताओं ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है. झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस और जेएमएम पर जमकर हमला बोला है.

रांची स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कांग्रेस का एकमात्र उद्देश्य सनातन धर्म को कमजोर करना है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता लगातार ऐसे बयान देते हैं जिससे समाज में भ्रम फैलता है. मरांडी ने कहा कि सनातन धर्म कभी भी अपनी संख्या बढ़ाने के लिए लोगों का धर्म परिवर्तन नहीं कराता.

उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय मूल्यों से आदिवासी है और उनका जीवन, संस्कृति और विचार काफी हद तक सनातन परंपरा से मेल खाते हैं। बाबूलाल मरांडी ने यह भी कहा कि धर्म परिवर्तन कर चुके लोग आदिवासी अधिकारों की बात कैसे कर सकते हैं. उन्होंने ‘डिलिस्टिंग’ की मांग दोहराते हुए कहा कि सरना हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा के लिए यह जरूरी कदम है.

बाबूलाल मरांडी ने सरना धर्म कोड के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अलग सरना धर्म कोड की मांग कर आदिवासी समाज को गुमराह कर रही है. मरांडी ने सवाल उठाया कि जब देश में लंबे समय तक कांग्रेस सत्ता में थी तो अलग सरना धर्म कोड क्यों नहीं लागू किया गया.

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को पहले इस बात के लिए माफी मांगनी चाहिए कि कांग्रेस ने इतने सालों तक आदिवासी समुदाय को अलग धार्मिक पहचान देने की दिशा में कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया.

दरअसल, दो दिन पहले झारखंड कांग्रेस के कई बड़े आदिवासी नेताओं ने 24 मई को आयोजित होने वाले आरएसएस के आदिवासी समागम को ‘दिखावा’ करार दिया था. कांग्रेस विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप और पूर्व वित्त मंत्री रामेशवर ओरांव ने कहा था कि सरना और सनातन अलग-अलग परंपराएं हैं और दोनों की अलग-अलग धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान है.

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इस बयान के बाद झारखंड में सरना धर्म कोड, आदिवासी पहचान और धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. बीजेपी जहां आदिवासी समुदाय को सनातन परंपरा से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस और जेएमएम अलग धार्मिक पहचान की मांग को लेकर मुखर हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना ​​है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा झारखंड की राजनीति में बड़ा रूप ले सकता है, क्योंकि आदिवासी वोट बैंक राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है.

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