Delhi Pollution: दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में नियंत्रण उपाय तेज कर दिए गए हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बुधवार को ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण दिल्ली-NCR में लागू कर दिया। यह फैसला वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंचने और आने वाले दिनों में भी प्रदूषण का स्तर ऊंचा बने रहने की आशंका के बाद लिया गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 20 अक्टूबर को 179 था, जो मध्यम श्रेणी में आता है। 21 अक्टूबर को दोपहर दो बजे यह बढ़कर 244 दर्ज किया गया। गुरुवार सुबह सात बजे राजधानी का AQI 226 रहा। AQI का 201 से 300 के बीच होना खराब वायु गुणवत्ता को दर्शाता है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के पूर्वानुमानों के आधार पर CAQM ने संबंधित एजेंसियों को प्रदूषण नियंत्रण के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने और हवा की गुणवत्ता की लगातार निगरानी करने को कहा है।
Delhi Pollution: GRAP-1 के तहत किन गतिविधियों पर रोक?
पहले चरण में सड़क की धूल, निर्माण स्थलों से निकलने वाले कणों और खुले में कचरा जलाने से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने पर जोर दिया गया है। संबंधित एजेंसियों को सड़कों की नियमित सफाई, पानी के छिड़काव और निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके तहत होटल, रेस्तरां और खुले भोजनालयों में तंदूर चलाने के लिए कोयले तथा लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। डीजल जनरेटर सेट का संचालन भी निर्धारित नियमों के तहत केवल अनुमत आवश्यक या आपातकालीन परिस्थितियों में किया जा सकता है।
निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के लिए जरूरी इंतजाम नहीं होने की स्थिति में संबंधित एजेंसियों और जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, GRAP के पहले चरण में सभी वाहनों या निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। विभिन्न प्रतिबंध संबंधित आदेशों और निर्धारित शर्तों के अनुसार लागू होंगे।
1 नवंबर से बाहरी वाहनों के लिए नए नियम
दिल्ली सरकार ने सर्दियों में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की घोषणा की है। इसके तहत 1 नवंबर से दिल्ली में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों में पंजीकृत उन वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की योजना है, जो BS-VI उत्सर्जन मानकों का पालन नहीं करते। निर्धारित श्रेणियों के वाहनों को लागू नियमों के अनुसार छूट मिल सकती है।
सरकार ने वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) के बिना चलने वाले वाहनों पर भी कार्रवाई तेज करने की बात कही है। ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नीति के तहत वैध प्रमाणपत्र नहीं होने पर वाहन को पेट्रोल, डीजल या अन्य संबंधित ईंधन देने से रोका जा सकता है। इस व्यवस्था का क्रियान्वयन लागू सरकारी निर्देशों के अनुसार होगा।
शीतकालीन कार्ययोजना में निर्माण से निकलने वाली धूल पर नियंत्रण, पार्किंग शुल्क में संभावित बढ़ोतरी और कार्यालयों में कामकाज के वैकल्पिक तरीकों जैसे उपाय भी शामिल हैं। सरकार ने एक नवंबर से 31 जनवरी तक बाहरी निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की योजना भी घोषित की है। इन अतिरिक्त उपायों की प्रभावशीलता संबंधित आदेशों और छूट की शर्तों पर निर्भर करेगी।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए निगरानी बढ़ाई गई
दिल्ली सरकार के मुताबिक, प्रदूषण से निपटने के लिए करीब 30 एजेंसियों के सहयोग से 11 सूत्री कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। इसमें यातायात प्रबंधन, सड़क की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसे विषय शामिल हैं।
निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन लगाने, यांत्रिक सड़क सफाई बढ़ाने और प्रदूषण से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई करने के उपाय भी योजना का हिस्सा हैं।
प्रशासन ने लोगों से सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने, वाहन साझा करने, प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता सुनिश्चित करने और खुले में कचरा नहीं जलाने की अपील की है।
आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और वायु गुणवत्ता के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण उपायों की समीक्षा की जाएगी। यदि हवा की गुणवत्ता और बिगड़ती है, तो संबंधित प्राधिकरण स्थिति के अनुसार आगे के कदम उठा सकते हैं।
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