Delhi Race Course Mosque: प्रधानमंत्री आवास के नजदीक स्थित ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद को खाली करने के नोटिस के बाद राजधानी में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने मस्जिद प्रबंधन को छह दिन के भीतर परिसर खाली करने का निर्देश दिया है। इस बीच, मस्जिद और आसपास की कई संपत्तियों की बिजली और पानी की आपूर्ति बंद किए जाने की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई से क्षेत्र में रहने वाले लोगों की परेशानियां बढ़ने की आशंका है।
अधिकारियों के अनुसार, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति सात अक्टूबर को बंद कर दी थी। वहीं, भूमि एवं विकास कार्यालय की ओर से लगभग 19 अक्टूबर को जारी नोटिस में परिसर खाली करने के लिए छह दिन का समय दिया गया। विभाग का कहना है कि संबंधित जमीन केंद्र सरकार के अधीन है और वहां मौजूद निर्माण को अनधिकृत माना गया है।
मस्जिद खाली कराने की कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है, जब रेस कोर्स रोड के आसपास अतिक्रमण हटाने और सरकारी जमीन को खाली कराने की प्रक्रिया भी चल रही है। इस कारण मस्जिद की कानूनी स्थिति के साथ-साथ वहां रहने वाले परिवारों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
Delhi Race Course Mosque: जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद
रेस कोर्स मस्जिद को एक सदी से अधिक पुरानी धार्मिक संरचना बताया जाता है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इसे नई दिल्ली नगरपालिका परिषद की विरासत सूची में शामिल किया गया है और यह ग्रेड-2 विरासत संरचना की श्रेणी में आती है।
ऐतिहासिक महत्व रखने वाली इस मस्जिद को लेकर मुख्य विवाद जमीन के स्वामित्व और परिसर में मौजूद निर्माण की कानूनी स्थिति से जुड़ा है। भूमि एवं विकास कार्यालय का पक्ष है कि जमीन सरकारी है और वहां कब्जा अनधिकृत है। दूसरी ओर, मस्जिद से जुड़े लोगों और कुछ मुस्लिम संगठनों ने धार्मिक स्थल के संरक्षण की मांग की है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग उठाई है। संगठन ने संबंधित अधिकारियों से मस्जिद और उससे जुड़े कब्रिस्तान की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। इसके साथ ही बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल करने तथा कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक तोड़फोड़ या बेदखली की कार्रवाई रोकने की मांग की गई है।
हालांकि, जमीन के स्वामित्व, विरासत संरक्षण और बेदखली से जुड़े सभी पहलुओं पर अंतिम स्थिति संबंधित दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।
करीब 700 परिवारों पर असर पड़ने की आशंका
रेस कोर्स रोड क्षेत्र में जारी कार्रवाई का असर मस्जिद तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, आसपास रहने वाले करीब 700 परिवार इससे प्रभावित हो सकते हैं। निवासियों को क्षेत्र खाली करने के लिए कहा गया है। साथ ही, प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
इससे पहले, दिल्ली हाईकोर्ट में प्रधानमंत्री आवास के नजदीक स्थित झुग्गी बस्ती के निवासियों के पुनर्वास से जुड़ा मामला उठा था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रभावित परिवारों को सावदा घेवरा में वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर भी विचार किया गया था।
हालांकि, झुग्गी बस्ती के पुनर्वास से संबंधित न्यायिक निर्देशों और मस्जिद की जमीन के स्वामित्व से जुड़े विवाद को अलग-अलग कानूनी मामलों के रूप में देखना जरूरी है। दोनों के बीच संबंध या किसी साझा आदेश की पुष्टि संबंधित न्यायिक दस्तावेजों से ही की जा सकती है।
धार्मिक गतिविधियों और आगे की कार्रवाई पर नजर
बिजली-पानी की आपूर्ति बंद होने और परिसर खाली करने का नोटिस जारी होने के बाद स्थानीय लोगों के सामने अनिश्चितता बनी हुई है। अधिकारियों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार को मस्जिद में नमाज अदा की गई थी।
अब इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि मस्जिद की जमीन के स्वामित्व से जुड़े दावे, उसके विरासत दर्जे और बेदखली की प्रक्रिया पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है। मस्जिद से जुड़े संगठनों की मांग है कि कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।