Daily Protein Target: क्या आपकी थाली में पूरा हो रहा है 60 ग्राम प्रोटीन?

Hemant Kumar
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Daily Protein Target Is your plate meeting the 60g protein requirement

Daily Protein Target: भारतीय खाना अपने स्वाद, विविधता और पोषण के गुणों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। पारंपरिक थाली जिसमें दाल, चावल, रोटी, सब्ज़ी, अचार और रायता होता है न सिर्फ़ देखने में अच्छी लगती है, बल्कि पोषण के लिहाज़ से भी संतुलित मानी जाती है। हालाँकि, जब शरीर की रोज़ाना की प्रोटीन की ज़रूरत पूरी करने की बात आती है, तो अक्सर यही थाली कम पड़ जाती है। ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च) के अनुसार, एक स्वस्थ वयस्क को रोज़ाना लगभग 60 ग्राम प्रोटीन की ज़रूरत होती है। हालाँकि, ज़्यादातर भारतीय अपनी रोज़ाना की डाइट से इस ज़रूरत को पूरा नहीं कर पाते हैं। इसके कई अहम कारण हैं।

Daily Protein Target: भारतीय थाली में कार्बोहाइड्रेट की अधिकता

भारतीय खान-पान में रोटी, चावल, आलू, पोहा और दूसरे अनाज सबसे ज़्यादा मात्रा में शामिल होते हैं। ये चीज़ें शरीर को ऊर्जा तो देती हैं, लेकिन इनमें प्रोटीन कम होता है। जानकारों के मुताबिक, कई घरों में खाने का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा कार्बोहाइड्रेट होता है, जिससे प्रोटीन वाली चीज़ों के लिए काफ़ी जगह नहीं बचती।

क्या केवल दाल-चावल से पूरी हो सकती है प्रोटीन की जरूरत?

अक्सर यह माना जाता है कि रोज़ाना दाल-चावल या दाल-रोटी खाने से शरीर में प्रोटीन की कमी नहीं होती। लेकिन, यह बात पूरी तरह सही नहीं है। दाल में प्रोटीन तो होता है, लेकिन साथ ही उसमें काफी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट भी होता है। अगर कोई व्यक्ति सिर्फ़ दाल से 60 ग्राम प्रोटीन पाना चाहे, तो उसे दिन भर में लगभग 7-8 कटोरे दाल खानी होगी और ज़्यादातर लोगों के लिए ऐसा करना प्रैक्टिकल नहीं है।

शाकाहारी भोजन में ‘कम्पलीट प्रोटीन’ की कमी

भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा शाकाहारी खाना खाता है। पनीर, दाल, राजमा और छोले जैसे खाद्य पदार्थों से प्रोटीन तो मिलता है, लेकिन इनमें सभी ज़रूरी अमीनो एसिड सही मात्रा में नहीं होते। इसलिए, एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि दाल को अनाज के साथ मिलाकर खाने (जैसे दाल-चावल या खिचड़ी) से प्रोटीन की क्वालिटी बेहतर होती है। वहीं दूसरी ओर, अंडे, मछली, चिकन और डेयरी प्रोडक्ट्स को अच्छी क्वालिटी वाले प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है।

खाना पकाने का तरीका भी करता है असर

भारतीय खाना अक्सर लंबे समय तक पकाया जाता है। मसालों को ज़रूरत से ज़्यादा भूनने या खाने को बार-बार गर्म करने से कुछ पोषक तत्वों की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। इसलिए, खाने को सही तरीके से पकाना ज़रूरी है। शाम के नाश्ते में अक्सर समोसे, कचौड़ी, बिस्कुट, नमकीन और मीठी चाय जैसी चीज़ें शामिल होती हैं, जिनमें प्रोटीन बहुत कम होता है। अगर आप इनकी जगह भुने हुए चने, मूंगफली, मखाने, दही, सत्तू या उबले अंडे जैसे विकल्प चुनते हैं, तो आप आसानी से अपने रोज़ाना के प्रोटीन इनटेक को बढ़ा सकते हैं।

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