Jharkhand Rajya Sabha Election: कांग्रेस का फैसला पड़ा भारी? झामुमो ने दिखाए तेवर

Hemant Kumar
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Jharkhand Rajya Sabha Election कांग्रेस का फैसला पड़ा भारी झामुमो ने दिखाए तेवर

Jharkhand Rajya Sabha Election: 2026 के राज्यसभा चुनावों से पहले झारखंड का राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया है। दो राज्यसभा सीटों के चुनाव से पहले महागठबंधन के भीतर मतभेद सामने आने लगे हैं। कांग्रेस द्वारा बोकारो निवासी प्रणव झा को अपना उम्मीदवार घोषित करने के बाद, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने भी दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने का संकेत देकर राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है।

Jharkhand Rajya Sabha Election: कांग्रेस और JMM आमने-सामने

कांग्रेस ने गुरुवार देर रात प्रणव झा को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया। हालांकि, इस फैसले से न केवल विपक्ष बल्कि कांग्रेस पार्टी के भीतर भी असंतोष फैल गया। कई नेताओं का मानना ​​है कि झा राज्य की सक्रिय राजनीति में सीधे तौर पर शामिल नहीं रहे हैं, इसीलिए उन्हें “पैराशूट उम्मीदवार” कहा जा रहा है। बताया जा रहा है कि उनके नाम पर अंतिम फैसला कांग्रेस हाई कमांड ने लिया था।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए परोक्ष रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की और पार्टी के लिए वर्षों तक काम करने के बावजूद अवसरों की कमी पर सवाल उठाया। इससे कांग्रेस के भीतर असंतोष की चर्चा और तेज हो गई है।

इसी बीच, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर जेएमएम की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें पार्टी के सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। बैठक से स्पष्ट संकेत मिला कि जेएमएम राज्यसभा की दोनों सीटों पर अपना दावा छोड़ने के मूड में नहीं है। पार्टी नेताओं ने तर्क दिया कि जेएमएम झारखंड की सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए दोनों सीटों पर उसका दावा स्वाभाविक है।

मंत्री हाफिजुल हसन ने मीडिया को बताया कि जेएमएम दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवारों को चुनाव लड़वाना चाहती है। विधायक बैद्यनाथ राम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सहमति के बिना अपने उम्मीदवारों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी सांसद, विधायक और मंत्री चाहते हैं कि जेएमएम दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे।

दोनों सीटों पर JMM उतारेगा उम्मीदवार

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि अगर कांग्रेस और जेएमएम अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारते हैं, तो महागठबंधन की एकता पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं। राज्यसभा चुनावों में संख्यात्मक शक्ति और रणनीति दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में गठबंधन के भीतर बढ़ते तनाव से चुनावी समीकरण बदल सकता है।

अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और जम्मू-कश्मीर महिला गठबंधन (जेएमएम) के नेतृत्व के अगले कदमों पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में पता चलेगा कि महागठबंधन आपसी सहमति से कोई समाधान निकाल पाएगा या राज्यसभा चुनाव झारखंड की राजनीति में एक नए विभाजन की शुरुआत साबित होंगे।

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