Dhanbad News: धनबाद जिले के बरोरा पुलिस थाना क्षेत्र में स्थित मंडल केन्दुडीह गांव में विस्थापन, मुआवजे और बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों और बीसीसीएल प्रबंधन के बीच विवाद गहरा गया है। गुरुवार को ग्रामीणों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बीसीसीएल बरोरा क्षेत्र के एएमपी कोलियरी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें बिना उचित योजना या मुआवजे के अपने घर खाली करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन करने पर पूरे गांव की बिजली काट दी गई, जिसके कारण उन्हें पिछले एक सप्ताह से अंधेरे में रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, बिजली कटौती से सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को हो रही है। भीषण गर्मी के बीच बिजली न होने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन लोगों को डराने के लिए बिजली शुल्क की वसूली के नोटिस भेज रहा है, जिसे वे अन्यायपूर्ण मानते हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित ग्रामीणों ने बताया कि वे पीढ़ियों से इसी गांव में रह रहे हैं। उनका दावा है कि उनके पूर्वज लगभग 100 वर्षों से इस क्षेत्र में निवास कर रहे हैं। 2011 तक प्रशासन भूमि अधिग्रहण की रसीदें जारी करता था, लेकिन बाद में यह प्रक्रिया रोक दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि कई मामलों में उन्हें अदालती फैसले मिल चुके हैं, जबकि कुछ मामले अभी भी लंबित हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग आठ एकड़ जमीन को 2011 के बाद विवादित घोषित कर दिया गया था। उनका कहना है कि इसी जमीन के कुछ हिस्सों को रैयती और अन्य हिस्सों को गैर-आवासीय घोषित कर दिया गया, जिससे विवाद और बढ़ गया। इस मामले की अदालत में सुनवाई चल रही है। इसके बावजूद, आरोप है कि बीसीसीएल प्रबंधन कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना ही गांव को खाली कराने की कोशिश कर रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि विस्थापन आवश्यक है, तो पहले योजना बनाई जाए और पर्याप्त मुआवजा दिया जाए। वे स्पष्ट रूप से कहते हैं कि पुनर्वास, रोजगार और मुआवजे के बिना वे अपने घर नहीं छोड़ेंगे। कई ग्रामीणों ने अपने अधिकारों के लिए लड़ने और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन का सहारा लेने के लिए अपनी भावनात्मक प्रतिबद्धता व्यक्त की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन से गांव में बिजली तुरंत बहाल करने की मांग की और योजना एवं मुआवजे से संबंधित मुद्दों के समाधान की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन करेंगे।इस पूरे विवाद ने कोयला क्षेत्र में विस्थापन, पुनर्वास और भूमि अधिकारों के मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदमों पर टिकी हैं।
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