Doctors Strike: झारखंड में डॉक्टरों का आंदोलन तेज, मांगें पूरी नहीं हुईं होगा अनिश्चितकालीन हड़ताल

Sumit Mishra
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Doctors Strike: झारखंड में डॉक्टरों का आंदोलन तेज, मांगें पूरी नहीं हुईं होगा अनिश्चितकालीन हड़ताल

Doctors Strike: झारखंड में अपनी मांगों को लेकर डॉक्टरों का विरोध तेज होता जा रहा है। बुधवार को रांची के रिम्स और सदर अस्पताल में बड़ी संख्या में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी जुटे। उन्होंने एकजुट होकर सरकार से अपनी समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू करेंगे।

यह आंदोलन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की झारखंड इकाई समेत 10 से अधिक चिकित्सा संगठनों के संयुक्त नेतृत्व में चल रहा है। फिलहाल डॉक्टर काली पट्टी बांधकर मरीजों का इलाज करते हुए अपना विरोध जता रहे हैं।

Doctors Strike: रिम्स में जुटे डॉक्टर, निदेशक कार्यालय को सौंपा ज्ञापन

बुधवार को आईएमए के आह्वान पर रिम्स में डॉक्टरों की बड़ी बैठक हुई। इसमें वरिष्ठ चिकित्सकों, जूनियर डॉक्टरों, सरकारी डॉक्टरों और निजी अस्पतालों से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सदर अस्पताल में भी डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने आंदोलन के समर्थन में अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

रिम्स में बैठक के बाद डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल ने निदेशक कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपा। उन्होंने संबंधित समस्याओं पर जल्द कार्रवाई करने और समाधान के लिए समयसीमा तय करने का आग्रह किया।

सुरक्षा से लेकर वेतन और करियर तक की मांगें

डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में सुरक्षित माहौल के साथ बेहतर कार्य व्यवस्था भी जरूरी है। उनकी प्रमुख मांगों में झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को प्रभावी तरीके से लागू करना, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा सरकारी चिकित्सकों के करियर में आगे बढ़ने के लिए बेहतर व्यवस्था लागू करना शामिल है।

इसके अलावा डॉक्टरों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों को भुगतान में होने वाली परेशानियों को दूर करने और क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के नियमों में व्यावहारिक बदलाव की मांग की है।

जूनियर डॉक्टरों की नियुक्ति और सेवा शर्तों, मेडिकल छात्रों के स्टाइपेंड और शैक्षणिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी आंदोलन में उठाए गए हैं। दंत चिकित्सकों के लिए करियर प्रगति की व्यवस्था, अस्पतालों के लाइसेंस और पंजीकरण की प्रक्रिया आसान बनाने तथा महिला चिकित्सकों को सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल है।

21 अक्टूबर को प्रदर्शन, 22 से कार्य बहिष्कार की चेतावनी

आंदोलन के तय कार्यक्रम के अनुसार, डॉक्टर 20 अक्टूबर तक काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। इसके बाद 21 अक्टूबर को राज्यभर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का ऐलान किया गया है। डॉक्टर संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं, बल्कि चिकित्सा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का समाधान कराना है। उन्होंने आपातकालीन और जीवनरक्षक सेवाओं को प्राथमिकता देने की बात भी कही है।

हालांकि, यदि कार्य बहिष्कार होता है, तो नियमित इलाज और अस्पतालों में आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में डॉक्टरों और सरकार के बीच समय रहते बातचीत होना जरूरी है, ताकि उनकी मांगों पर समाधान निकले और मरीजों का इलाज भी प्रभावित न हो। फिलहाल सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि आंदोलन आगे बढ़ेगा या डॉक्टरों की मांगों पर कोई सहमति बन पाएगी।

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