Jantar Mantar demonstration: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों और चुनाव आयोग की मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर विवाद जारी है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इन मामलों से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई की।अदालत में प्रदर्शनकारियों की हिरासत, पत्रकारों और वकीलों के साथ कथित पुलिस ज्यादती तथास्थ जंतर-मंतर (Jantar Mantar) को अधिकृत प्रदर्शन ल की सूची से हटाने के फैसले जैसे मुद्दे उठाए गए।
सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा। वहीं, जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए। अदालत ने अधिकारियों को प्रदर्शन से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया।
Jantar Mantar demonstration: पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठा
सुनवाई के दौरान प्रदर्शन कवर कर रही महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े आरोप भी सामने आए। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने शिकायतों की जांच के लिए एक समिति गठित करने की संभावना पर विचार किया। प्रस्तावित समिति में सेवानिवृत्त महिला न्यायाधीश और अन्य महिला सदस्यों को शामिल करने का सुझाव दिया गया।
प्रदर्शन के दौरान वकीलों के साथ कथित मारपीट और हिरासत में लिए जाने के मामलों पर भी अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
CJP का तिरंगा मार्च, राजनीतिक दलों से शामिल होने की अपील
दूसरी ओर कक्रोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च निकालने का ऐलान किया है। यह कार्यक्रम शाम पांच बजे प्रस्तावित है। दीपके ने राजनीतिक दलों, युवा संगठनों, किसान यूनियनों और छात्र संगठनों से इसमें शामिल होने की अपील की है।
दीपके ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए दिल्ली में लोगों की आवाजाही और सार्वजनिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि रेलवे और मेट्रो सेवाओं पर पाबंदियों से राजधानी में लोगों को परेशानी हुई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दीपके ने यह भी कहा कि दिल्ली नहीं पहुंच पाने वाले समर्थक अपने-अपने शहरों में तिरंगा मार्च आयोजित करें। उनका कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज लेकर प्रदर्शन करना अपराध नहीं होना चाहिए।
दो नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत
इस विवाद की शुरुआत 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से हुई थी। पुलिस के मुताबिक, CJP के सदस्यों ने सुरक्षा बैरिकेड पार कर परिसर में प्रवेश किया था। उस समय जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया जा चुका था।
पुलिस ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की और ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाली। इसके बाद पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया गया। बुधवार को दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया।
इसी मामले में अजिंक्य शिंदे को 5,000 रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया गया। उन्हें छह महीने तक शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने का निर्देश दिया गया। हालांकि, CJP के प्रतिनिधियों ने पुलिस के आरोपों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नेताओं के खिलाफ कार्रवाई उचित आधार पर नहीं की गई। पार्टी ने हिरासत के दौरान वकीलों से संपर्क करने में देरी होने का आरोप भी लगाया है।
विपक्ष ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन समेत कई विपक्षी नेताओं ने आलोचना की है।वहीं, दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नियमों के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए कार्रवाई का बचाव किया है। चुनाव आयोग ने भी SIR प्रक्रिया में राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।
फिलहाल, 16 अक्टूबर को प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर आधिकारिक अनुमति की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में कार्यक्रम से पहले प्रशासन का अंतिम रुख महत्वपूर्ण होगा। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई और प्रस्तावित मार्च के बीच अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन किस तरह कायम किया जाता है।
यह भी पढ़ें: Sand Mining in Jharkhand महंगी बालू से निर्माण कार्य प्रभावित